बाग़बान 

मेरी ज़िंदगी बड़ी वीरान पड़ी है 
बेरंग है, सन्नाटे से भरी है 
कभी यहाँ भटकती हूँ 
कभी वहाँ ठहरती हूँ 
कहते हैं ख़ूबसूरती 
देखने वाले की आँखो में है 
ए रक़ीब मेरी ज़िंदगी पे 
एक नज़र डाल दे 
तो में भी बाग़बान बन जाऊँ |

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