मेरी ज़िंदगी बड़ी वीरान पड़ी है
बेरंग है, सन्नाटे से भरी है
कभी यहाँ भटकती हूँ
कभी वहाँ ठहरती हूँ
कहते हैं ख़ूबसूरती
देखने वाले की आँखो में है
ए रक़ीब मेरी ज़िंदगी पे
एक नज़र डाल दे
तो में भी बाग़बान बन जाऊँ |
मेरी ज़िंदगी बड़ी वीरान पड़ी है
बेरंग है, सन्नाटे से भरी है
कभी यहाँ भटकती हूँ
कभी वहाँ ठहरती हूँ
कहते हैं ख़ूबसूरती
देखने वाले की आँखो में है
ए रक़ीब मेरी ज़िंदगी पे
एक नज़र डाल दे
तो में भी बाग़बान बन जाऊँ |