मर्ज़ी

कहा तुमने की तुम
चले जाओ 
हम इतने नासमझ निकले 
चले गए 
वहाँ तुम ग़ुस्साए 
रह गए 
यहाँ हम झल्लाए 
रह गए 
जो ग़र तुम्हारी 
मर्ज़ी समझ जाते 
तो हम कहीं नहीं जाते 
और जो ग़र तुमने 
कह दिया होता की ना जाओ 
तो शायद आज भी 
हम दोनों बंधे बंधे होते|

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